Saturday, February 1, 2014

॥ वो यू गए जैसे शब्दो के नाम ॥

वो यू गए जैसे शब्दो के नाम,
आँखों मे छोड़ गए एक शाम,
एक तन्हा भीगी शाम ॥

वफा के सारे लेखापत्र फट गए,
दीवानगी के सारे रंग सूरज की किरणों से छट गए,
धडकनों को अब कैसे मिले आराम ॥

वो यू गए जैसे........

कटीले शूल है अब राहों मे,
के चुभ रहे है हर “गाम” मेरे पाओं मे,
के हो गए हम फिर से बदनाम ॥

वो यू गए जैसे........

हवाओं ने अपना रुख मोड दिया,
हर डगर ने पीछे छोड़ दिया,
गगन भी समेट ले गया आँचल मे अपने शाम ॥

वो यू गए जैसे........

हर रात तेरी याद मे मचलती रही,
शमा हर “बाम” पे जलती रही,
मगर फिर भी “महेश” तू हो गया नाकाम ॥

वो यू गए जैसे शब्दो के नाम,
आँखों मे छोड़ गए एक शाम,
एक तन्हा भीगी शाम ॥

गाम – कदम

बाम – छज्जा 

2 comments:

  1. Tanha bheegi sham ko sawaar le
    tu phir se koi zaam utha..
    phir se koi naam le..
    kise k zane se zindagi rukti nhi
    chupi hui lakeere har kise ko dikhati nahi

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